वर्मी कम्पोस्ट एक महत्वपूर्ण, प्रभावशाली, विश्वासपूर्ण एवं लाभदायक तकनीक है। जिससे तेजी से कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। वर्मी कम्पोस्ट में जीवित पदार्थ होते है इसमें मिट्टी में पाए जाने वाले लाभदायक जीवाणु होते है। वर्मीकम्पोस्ट से पौधे मजबूत, स्वस्थ्य तथा बिमारियों के प्रति अधिक सहनशील होते है।
वर्मीकम्पोस्ट में सर्वोत्तम मात्रा में फास्फोरस, नाइट्रोजन, पोटेशियम, कैल्शियम, तथा मैगनीशियम आदि पाए जाते है जो पौधे के जल्दी व सरलता से प्राप्त होते है। वर्मीकम्पोस्ट की उत्पति कार्बनिक पदार्थ से होती है जो फसलों व पोधो की वृद्धि के लिए अति उत्तम होती है।
वर्मीकम्पोस्ट में नमी होने के कारण यह मिट्टी के लिए कंडीशनर के तौर पर कार्य करती है। वर्मीकम्पोस्ट ऑर्गेनिक और नेचुरल होती है जिससे मित्र कीटों व सूक्ष्म जीवों की संख्या में वृद्धि होती है, जिससे फसल उत्पादन अधिक होता है।
वर्मीकम्पोस्ट में ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकिनिन, विटामिन और अमीनो एसिड जैसे बायोएक्टिव पदार्थ पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो पौधों की संतुलित ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं और उनकी पैदावार की क्षमता को बढ़ाते हैं। वर्मीकम्पोस्ट बहुत ज़्यादा पानी सोखता है, यह वातावरण से नमी और पौधों को सिंचाई से मिलने वाला पानी सोख लेता है,
जिससे भाप बनने और लीचिंग की वजह से मिट्टी से पानी का नुकसान नहीं होता। इसलिए, जब खेत में वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग किया जाता है, तो पौधों को बार-बार या ज़्यादा पानी देने की ज़रूरत नहीं पड़ती। वर्मीकम्पोस्ट में अनेक तरह के सूक्ष्म जीव नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवाणु, फॉस्फोरस घोलक जीवाणु, पौधों की बढ़वार में वृद्धि करने वाले जीवाणु,
एक्टीनोमाइसिटीज, फफूँद और सैलूलोज व लिगनिन को विघटित करने वाले पॉलीमर्स भारी संख्या में मौजूद रहते हैं। ये सूक्ष्म जीव भूमि में मौजूद पेड़-पौधों के अवशेष तथा अन्य जैविक कचरे को सड़ाने व पौधों की बढ़वार में सहायक होते हैं।