केंचुए खेत की मिट्टी को उपजाऊ, भुरभुरा और हवादार बनाकर फसल की पैदावार 15-20% तक बढ़ाते हैं।
वे ऑर्गेनिक कचरे को बेहतरीन वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) में बदलते हैं, जो पौधों को ज़रूरी पोषक तत्व (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम) देता है। केंचुए मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता बढ़ाते हैं और कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं।
आइसेनिया फेटिडा, जिन्हें रेड विग्लर्स या ब्रैंडलिंग वर्म्स भी कहा जाता है, बहुमुखी जीव हैं। ये एअर्थवर्मस कम्पोस्टिंग में, बागवानी, मछली पकड़ने और पालतू जानवरों खाने आदि में काम आते है। केंचुए की तेज़ी से प्रजनन दर और ऑर्गेनिक पदार्थ को
कुशलता से खाने, कम्पोस्ट बनाने की क्षमता उन्हें टिकाऊ तरीकों के लिए लोकप्रिय बनाती है। केंचुए मिट्टी से पोषक तत्वों को ऊपर लाते हैं और ऑर्गेनिक चीज़ों को उपजाऊ खाद में बदलते हैं। केंचुओं की सुरंगों से मिट्टी में हवा का संचार (aeration)
केंचुओं की सुरंगों से मिट्टी में हवा का संचार (aeration) बढ़ता है, जिससे जड़ें गहराई तक जाती हैं। इन सुरंगों के कारण मिट्टी में पानी ज्यादा समय तक रुकता है और सिंचाई की जरूरत कम होती है।बढ़ता है, जिससे जड़ें गहराई तक जाती हैं।
इन सुरंगों के कारण मिट्टी में पानी ज्यादा समय तक रुकता है और सिंचाई की जरूरत कम होती है। इसलिए केंचुओं को "किसानों का मित्र" भी कहा जाता है।